गुरुवार, 25 जनवरी 2024

किसी के साथ चलते चलते।


किसी के साथ चलते चलते,
क्या मिला नहीं जाना,
पर सब कुछ छूटता चला गया।

रविवार, 12 मार्च 2023

बंधन - मुक्ति।

बुद्धि ही बंधन का कारण है, और बुद्धि ही मुक्ति का माध्यम भी है।

शनिवार, 11 मार्च 2023

अद्वैत

क्या तुम उस प्रेम को देख सकते हो जो हर क्षण तुम्हारे अंदर पैदा होता है, जब तुम स्वीकार भाव में होते हो, पूर्ण स्वीकार, पूर्ण समर्पण भाव। तब तुम्हें चिंता नहीं की अगले क्षण क्या होगा, तब तुम्हारा चुनाव गिर जाता है ताश के पत्ते से बने हुए महल की तरह। उस निश्चिंतता में तुम्हें नहीं परवाह आगे क्या होगा या अब तक जीवन में क्या हुआ। क्या ये स्वीकार भाव उतरा है जीवन में? 

शुक्रवार, 10 मार्च 2023

मैं कौन हूं।

 जागृत में मैं कुछ हूं, लेकिन कुछ नहीं भी हूं।

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

मुक्ति

मुक्ति ढूंढने से नहीं मिलेगी,

मुक्ति ढूंढे बिना भी नहीं मिलेगी।

सोमवार, 25 जुलाई 2022

अप्राप्त

जो प्राप्त हुआ है, या हो सकता है, वो अभी भी अप्राप्त के लिए अप्राप्त ही है।

रविवार, 3 जुलाई 2022

देखना!!

केवल देखना मात्र है, जैसा है उसे वैसा ही केवल देखा जा रहा है। उसको बदलना नहीं है, उसे पाना नहीं है, कोई पूर्वाग्रह नहीं है, कोई नाम नहीं देना है, कोई ज्ञान नहीं प्राप्त करना है।

रविवार, 3 अप्रैल 2022

कभी वो भी सुनता, जो कोई ना कहता।

जो ना कहता, और ना सुनता,

वही है कहता, वही है सुनता।

जो ना आता, और ना जाता,

वही है आता, वही है जाता।

रविवार, 27 मार्च 2022

ज्ञान ट्वीट #७ साक्षी


'मैं साक्षी हूं', यह जानना चेतना है। पर यह भी कौन जान रहा है, उसको ढूंढो तो आप स्वयं ही साक्षी हो, इसमें कोई संशय नहीं रह जायेगा।

शनिवार, 19 मार्च 2022

तीन दृष्टिकोण

तीन तरह के दृष्टिकोण हो सकते हैं - भौतिक वादी, द्वैत वादी और अद्वैत।

बुधवार, 2 मार्च 2022

बंधन और मुक्ति।

जो मुक्त है, यानी साक्षी या अनुभव को जानने वाला, वो सदा मुक्त ही है, वो कभी बंधन में था ही नहीं। 

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

समर्पण

समर्पण क्या है?


समर्पण का अर्थ है सम + अर्पण। जो कुछ भी मैंनें अपने आप को मान लिया है, वो सब कुछ अर्पण कर देना, समर्पण है। अपना अज्ञान, मान्यताओं, पूर्वाग्रह, मतारोपण आदि का त्याग समर्पण है। अपने स्वरूप में समता पूर्वक स्थिति समर्पण है।

बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

तृप्ति


आप पहले से ही अपने घर पर हैं, अब कहां जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस संघर्ष को भी समाप्त करने का संघर्ष मत करो, वो भी निरर्थक ही होगा। 

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

कवितायें।


1) अन्तरमन


अपने अन्तर मन में उन्हें देखो,

सबमें वही मिलेंगे।

मंगलवार, 16 नवंबर 2021

गुरुजी


ज्ञान मार्ग पर पूजा नहीं,

नहीं तो तुम्हारी पूजा ही कर लेता।


सभी कुछ माया है,

नहीं तो तुमको सत्य ही मान लेता।

शनिवार, 9 अक्टूबर 2021

ना खोया ना पाया

ना खोया ना पाया,

कुछ होता तो खोता,

कुछ होता तो पाता,

कुछ पाता तो खोता।

रविवार, 5 सितंबर 2021

नमन

मैं हूँ, तुम हो, और कोई नहीं;

मैं भी नहीं, तुम भी नहीं, कुछ है ही नहीं।

बुधवार, 25 अगस्त 2021

ज्ञान ट्वीट #६


ना तेरा कुछ है, ना मेरा कुछ है,

क्यों तेरा मेरा करता है रे बंदे।

शनिवार, 14 अगस्त 2021

Purpose

One of my old friend asked me "what does purposelessness mean to you? Can you be without any purpose at any point in time?"

शनिवार, 24 जुलाई 2021

साक्षी और साक्षी भाव।


साक्षी वो सत्ता या चैतन्य है जो यह शब्द इस समय पढ़ रहा है। उसको कहीं दूर ना समझें, उसे ढूंढने ना निकल पड़ें, वो कहीं नहीं मिलेगा, वो कभी नहीं मिलेगा। इसके दो कारण हैं, पहला वह कहीं गया नहीं तो मिलेगा कैसे, जो दूर है जो कभी अप्राप्त है वो मिल सकता है, पर साक्षी कभी भी अप्राप्त नहीं हुआ है, इसलिये वो प्राप्त नहीं किया जा सकता है।