शुक्रवार, 16 जुलाई 2021
ज्ञान ट्वीट #५
रविवार, 4 जुलाई 2021
आनंद मेरा नित्य स्वरूप है।
क्या है जो मुझे मेरे नित्य आनंद स्वरूप में स्थिर रहने से दूर करता है? क्या साधना करनी पड़ेगी, क्या प्रयास करूं कि मैं उसमें स्थित हो जाऊं? क्या ऐसा कोई मानव है जो सर्वदा आनंद में है? क्या मनुष्य के लिए हमेशा नित्य आनंदमय स्थिति में रहना सम्भव भी है? क्या आनंद कोई अनुभूति है, क्या यह कम ज्यादा होता रहता है? क्या आनंद जीवन का लक्ष्य है? सुख और आनंद क्या एक ही हैं?
आइये इसपर कुछ मनन करते हैं।
रविवार, 16 मई 2021
आत्मबोध।
अहम वृत्ति यानि जिसको भी 'मैं' समझा है, और मैं समझकर उससे तदात्म्य बना लिया है। तदात्म्य का अर्थ है, कुछ भी 'यह' है उसको 'मैं हूँ' या 'यह मैं हूँ' ऐसा मान लेना। अहम वृत्ति उत्पन्न होने के साथ ही बाकी सब 'अन्य' हो जाते हैं। फिर वो चाहे अन्य वस्तु हो या अन्य व्यक्ति। अहम भाव उत्पन्न होते ही अंदर - बाहर की कल्पना का भी जन्म हो जाता है।
गुरुवार, 29 अप्रैल 2021
अवस्था त्रयम विवेक।
मैं चित्त में उठने-गिरने वाली अनेक वृत्तियों का दृष्टा हूँ। चित्त की विभिन्न अवस्थायें आती जाती रहती हैं, मैं इन अवस्थाओं के साथ नहीं बदलता। चित्त का एक वस्तु की तरह अध्यन करने से उसके प्रति आसक्ति कम हो जाती है, और एक दूरी बन जाती है मुझमें और चित्त की अनेक वृत्तियों में। 'मुझमें' यानि चैतन्य स्वरूप में और चित्त की अनेक वृत्तियों में।
शनिवार, 17 अप्रैल 2021
ज्ञान ट्वीट #4
जो भाग सकता है वो रुक भी सकता है। दुर्भागवश यह सामान्य ज्ञान दुनिया में अधिकतर नदारद है।
मन बहुत इधर उधर भटकता रहता है, थोड़ा उसे रुकने दें। आत्मबोध से मन की गति कम होने लगती है, क्योंकि आत्मन से अद्भुत दुनिया में कुछ नहीं है।
मंगलवार, 13 अप्रैल 2021
पूर्णता से पूर्णता।
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021
ज्ञान मार्ग पर दो कदम।
पहला है 'नेती नेती'।
अद्वैत में बहुत प्रचलित, इन आसान पर अध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण शब्दों का अर्थ है, 'यह नहीं' 'यह नहीं' (न + इति)।