जो प्राप्त हुआ है, या हो सकता है, वो अभी भी अप्राप्त के लिए अप्राप्त ही है।
सोमवार, 25 जुलाई 2022
रविवार, 3 जुलाई 2022
देखना!!
केवल देखना मात्र है, जैसा है उसे वैसा ही केवल देखा जा रहा है। उसको बदलना नहीं है, उसे पाना नहीं है, कोई पूर्वाग्रह नहीं है, कोई नाम नहीं देना है, कोई ज्ञान नहीं प्राप्त करना है।
रविवार, 3 अप्रैल 2022
कभी वो भी सुनता, जो कोई ना कहता।
जो ना कहता, और ना सुनता,
वही है कहता, वही है सुनता।
जो ना आता, और ना जाता,
वही है आता, वही है जाता।
रविवार, 27 मार्च 2022
ज्ञान ट्वीट #७ साक्षी
'मैं साक्षी हूं', यह जानना चेतना है। पर यह भी कौन जान रहा है, उसको ढूंढो तो आप स्वयं ही साक्षी हो, इसमें कोई संशय नहीं रह जायेगा।
शनिवार, 19 मार्च 2022
बुधवार, 2 मार्च 2022
बंधन और मुक्ति।
जो मुक्त है, यानी साक्षी या अनुभव को जानने वाला, वो सदा मुक्त ही है, वो कभी बंधन में था ही नहीं।
मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022
समर्पण
समर्पण क्या है?
समर्पण का अर्थ है सम + अर्पण। जो कुछ भी मैंनें अपने आप को मान लिया है, वो सब कुछ अर्पण कर देना, समर्पण है। अपना अज्ञान, मान्यताओं, पूर्वाग्रह, मतारोपण आदि का त्याग समर्पण है। अपने स्वरूप में समता पूर्वक स्थिति समर्पण है।
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