बुद्धि ही बंधन का कारण है, और बुद्धि ही मुक्ति का माध्यम भी है।
रविवार, 12 मार्च 2023
शनिवार, 11 मार्च 2023
अद्वैत
क्या तुम उस प्रेम को देख सकते हो जो हर क्षण तुम्हारे अंदर पैदा होता है, जब तुम स्वीकार भाव में होते हो, पूर्ण स्वीकार, पूर्ण समर्पण भाव। तब तुम्हें चिंता नहीं की अगले क्षण क्या होगा, तब तुम्हारा चुनाव गिर जाता है ताश के पत्ते से बने हुए महल की तरह। उस निश्चिंतता में तुम्हें नहीं परवाह आगे क्या होगा या अब तक जीवन में क्या हुआ। क्या ये स्वीकार भाव उतरा है जीवन में?
शुक्रवार, 10 मार्च 2023
गुरुवार, 15 सितंबर 2022
सोमवार, 25 जुलाई 2022
रविवार, 3 जुलाई 2022
देखना!!
केवल देखना मात्र है, जैसा है उसे वैसा ही केवल देखा जा रहा है। उसको बदलना नहीं है, उसे पाना नहीं है, कोई पूर्वाग्रह नहीं है, कोई नाम नहीं देना है, कोई ज्ञान नहीं प्राप्त करना है।
रविवार, 3 अप्रैल 2022
कभी वो भी सुनता, जो कोई ना कहता।
जो ना कहता, और ना सुनता,
वही है कहता, वही है सुनता।
जो ना आता, और ना जाता,
वही है आता, वही है जाता।
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